याद है मुझे उनकी वो पहली मुलाकात,
गर्द धूप में मिले थे दोनों, जब हुई थी उनकी पहली बात,
धूप काफी तेज थी, मिलने की चाह भी उसे बुलंद थी,
कोई रोक ना सके ऐसी वो मदहोश कहानी थी!
उस रोज़ वो मिले थे, किसी अनजान शहर में दो नए फूल खिले थे…
आज भी उसे वो दिन याद है, शायद तुम्हें भी उसकी पहचान है!!

वो आई थी उससे मिलने
जैसे उसे पसंद था
गर्द सी उसकी लाली भी
सज सावर कर वो एक मुस्कान ले आई थी…
सफेदी की झालर थी, उसपे नीले दुपट्टे की शान थी…
आंखों में सुरमा था और उसे ढकने वाले काले चश्मे थे…
जो बेहद उसे भाते थे…
वो बिंदी भी यूं चमक रही थी वो धूप में…
मदहोशी थी उस पूरे मौसम में
बालों का क्या कहूं, कभी बंदे तो कभी खुले थे…
वो जैसे चाहता था वो अपने रंग बदल रहे थे
दोनों ने अनजाने नज़रों से देखा जो ज़रूर था…
शायद ही वो दोनों को उस बात का पता था…
वो मुस्कान जो दोनों के चेहरे पे छाई थी…
मानो कोई छीन ना ले उसे ऐसी एक अलग कहानी थी…
नारंगी पहनाव था उसका
मुस्कान भी लाजवाब थी…
खामोशी यूं छाई थी जैसे मुस्कान उस घड़ी की चाबी थी…
बातों का मशखुरा खुला ही था…
कि खिलखिलाहट हर तरफ छाई थी!
नज़रों से इशारे हुए, मुस्कान तो हरदम छाई थी,
बातें भी बढ़ रही थी, और धीरे धीरे खामोशी घट रही थी..
कहीं अनजान राहों में वो बह गए थे…
एक दूसरे की नज़रों में वो खुद को ढूंढ रहे थे!
समय भी अनजान था, शायद दो दिल मिल रहे थे!
वो लाली भी अब कुछ मिट सी गई थी…
वो उसके बाहों में लिपट सी गई थी!
मानो वो उसे छोड़ दे तो दुनिया उसकी खत्म थी..
वक्त का पता नहीं चला उन्हें वो दोपहर भी एक सलोनी शाम बन गई थी
वो रोई थी उसकी बाहों में
उस रोज उसे अपना मान के
मिठास ऐसी थी मानो उनकी वो एक सुनहरी रात थी!
वक्त ढल रहा था उसे भी अब घर जाना था..
उस वक्त बिछड़ना दोनों को मंजूर नहीं था
कश्तियां रोज मुकम्मल होने लगी और वो दोनों यूं ही हंसते रहे
एक अंधेरी सी रात में वो दोनों मदहोश हुए!
जंग छिड़ी थी, अंगारे भी जल रहे थे
दोनों के आक्रोश में दिल भी बिछड़ रहे थे
वो रात आज भी उसे याद है
रोना भी उसे वो ज्ञात है
कैसे लिपट कर रोई थी वो उस कंबल को भी याद है
किसे मालूम था वो मुलाकात जिसे वो यादों में छुपाए थी
वो यादें वो फिर ना बना पाएंगे…
शामें बीत गई, रिश्ते टूट गए!
दिल भी यूं ही बिछड़ गए!
और वो एक मुलाकात सिर्फ मुलाकात बनकर उनकी जिंदगी में यूं ढल गई,
मानो वो एक मुलाकात उनकी आखिरी मुलाकात बन गई!
वो आखिरी मुलाकात बन गई!
— Sayali